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कम उम्र में ही आपको बहरा बना सकती है यह आदत

बैक-टू-बैक मीटिंग्स, वर्क कॉल्स, संगीत सुनने और फोन पर बातें करने के लिए लोगों को पहले से कहीं ज्यादा ईयरफोन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर आप भी ईयरफोन जैसे उपकरणों का प्रयोग बहुत ज्यादा कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए
पहले केवल किशोर और युवा लोग मनोरंजन के लिए ईयरफ़ोन या ईयर प्लग का उपयोग करते थे, अब बच्चों और बुजुर्गों की भी यही आदत बन चुकी है।
ईयरफ़ोन या ईयर प्लग कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं, कम उम्र में ही लोगों को कम सुनाई देने और यहां तक कि बहरेपन की दिक्कतें हो रही हैं।
तेज आवाज में इयरफ़ोन के लंबे समय तक उपयोग के कारण लोगों में कान से जुड़ी दिक्कतें तेजी से बढ़ती जा रही हैं।
डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों के मुताबिक ईयरफोन जैसे उपकरणों की आवाज को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक है। 90 डीबी से ऊपर की आवाज, लॉन में घास काटने की मशीन चलने की आवाज के बराबर होती है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इन उपकरणों की ध्वनि का औसत स्तर 80-90 डीबी के बीच ही होना चाहिए। 100 डीबी से ऊपर की आवाज सुनना कानों के लिए गंभीर दिक्कतें पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ईयरफोन के कारण कान में होने वाले नुकसान को कुछ सावधानियां बरतते हुए कम किया जा सकता है।
सबसे पहले ध्यान रखें कि ईयरफोन की आवाज बहुत तेज न हो और न ही इसे लंबे समय तक लगाकर रखें। ईयरफोन के रबर को अल्कोहलिक रब से साफ करें और उपयोग करने से पहले उन्हें सुखा लें।
अगर कानों में खुजली हो रही है, तो बाहरी हिस्से पर चिकनाई के लिए नारियल का तेल लगाएं, उसे ज्यादा खरोचें यह रगड़ें नहीं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ईयरफोन का इस्तेमाल कम से कम करें। हालांकि यदि आपको इसकी बहुत ज्यादा आवश्यकता रहती है तो ईयर-प्लग की बजाय ओवर-द-हेड ईयरफ़ोन का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।
अच्छी क्वालिटी के  ईयरफोन का इस्तेमाल करना बेहतर होता है, यदि ईयरफोन के आकार या आवाज के कारण कानों में दर्द हो रहा हो तो इसे तुरंत निकाल दें।
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