राजस्थान में भी फैल सकता है किसानों का आंदोलन


एसपी मित्तल
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद किसानों का आन्दोलन राजस्थान में भी फैल सकता है। जो हालात किसानों के सामने महाराष्ट्र और एमपी में हैं, वैसे ही हालात राजस्थान में भी हैं। किसान कर्ज में डूबा पड़ा है तो उसे मौसमी सब्जियों की लागत भी नहीं मिल रही है।
हाड़ौती के किसान लहसुन की बंपर पैदावार से दुखी हैं तो जयपुर के किसान टिण्डे, सफेद प्याज को मात्र 2 रुपए किलो में बेचने को मजबूर हंै। राजस्थान के कई इलाकों में पानी की कमी की वजह से कृषि करना मुश्किल होता है। लेकिन किसानों को मेहनत की कीमत भी नहीं मिल पा रही है। जिन किसानों ने कॉ-आपरेटिव बैंकों से सरकार की विभिन्न योजनाओं में लोन लिया है, वे अब चुकाने में असमर्थ है। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन अभी तक भी सरकार ने कोई सुध नहीं ली है।
असल में यूपी में भाजपा सरकार द्वारा किसानों के कर्ज माफ किए जाने की घोषणा के बाद से ही राजस्थान में भी कर्ज माफी की मांग उठने लगी है। राजस्थान में भी भाजपा की ही सरकार है। राजस्थान की सीमा मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से लगी हुई है। इन दिनों मंदसौर के जो हालात हैं, उसका असर सीमावर्ती जिलों में पड़ सकता है। राजस्थान में भी मध्यप्रदेश की तरह अगले वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं। कांग्रेस भी चाहेगी कि राजस्थान में भी किसानों का आंदोलन शुरू हो। ऐसे में सरकार को मध्यप्रदेश के हालातों को गंभीरता से लेना चाहिए।

बेमियादी धरना 15 जून से :
भारतीय किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि 15 जून से राजस्थान के सभी संभाग मुख्यालयों पर बेमियादी धरना दिया जाएगा। किसानों की मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन राज्य सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। सरकार की अनदेखी की वजह से किसानों में भारी नाराजगी है। सरकार ने प्रमुख जीन्सों का अभी तक समर्थन मूल्य भी घोषित नहीं किया है।
त्रस्त किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है। प्रदेश में गेहूं, चना, सरसों, धनिया, जीरा के साथ-साथ बाजरा, ग्वार, मक्का, मूंग, उड़द, मोठ आदि कृषि पैदावार है। किसानों को सब्जियों के दाम भी नहीं मिल रहे हैं। 
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