Super TET CDP Notes in Hindi

Super TET CDP Notes in Hindi: बाल मनोविज्ञान के टॉप 50 वन-लाइनर प्रश्न

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यूपी सुपर टीईटी (UP Super TET) और UPTET परीक्षा की तैयारी कर रहे सभी उम्मीदवारों के लिए आज हम बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) और शिक्षण कौशल के 50 सबसे महत्वपूर्ण ‘वन-लाइनर’ नोट्स लेकर आए हैं।

परीक्षा के अंतिम दिनों में मोटी किताबें पढ़ने का समय नहीं होता, तब यह क्विक-रिवीजन (Quick Revision) नोट्स आपके लिए रामबाण साबित होंगे। इसमें जीन पियाजे, वायगोत्स्की, थार्नडाइक से लेकर NEP 2020 और समावेशी शिक्षा तक के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। आइए इन्हें ध्यान से पढ़ते हैं:

Super TET बाल मनोविज्ञान (CDP) – टॉप 50 वन-लाइनर नोट्स

  1. मनोविज्ञान के जनक: आधुनिक मनोविज्ञान के जनक ‘विलियम जेम्स’ और प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के जनक ‘विल्हेम वुंट’ को माना जाता है।

  2. शिक्षा मनोविज्ञान: शिक्षा मनोविज्ञान का जनक ‘एडवर्ड थार्नडाइक’ को कहा जाता है।

  3. बाल-विकास की दिशा: विकास की दिशा ‘सिर से पैर की ओर’ (Cephalocaudal) और ‘केंद्र से बाहर की ओर’ (Proximodistal) होती है।

  4. किशोरावस्था का कथन: “किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव और तूफान की अवस्था है” – यह प्रसिद्ध कथन ‘स्टेनले हॉल’ का है।

  5. निरंतरता का सिद्धांत: विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो ‘गर्भावस्था से लेकर जीवनपर्यंत’ (Womb to Tomb) चलती है।

  6. जीन पियाजे: पियाजे ने ‘संज्ञानात्मक विकास’ (Cognitive Development) की 4 अवस्थाएं बताई हैं – संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त-संक्रियात्मक और औपचारिक-संक्रियात्मक।

  7. वस्तु स्थायित्व (Object Permanence): यह गुण पियाजे की पहली ‘संवेदी-गामक अवस्था’ (0-2 वर्ष) में बच्चों में आ जाता है।

  8. स्कीमा (Schema): मस्तिष्क में सूचनाओं और ज्ञान को व्यवस्थित करने का एक पैटर्न ‘स्कीमा’ कहलाता है।

  9. लेव वायगोत्स्की: इन्होंने अधिगम का ‘सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत’ (Socio-Cultural Theory) दिया, जिसके अनुसार बच्चा समाज के साथ अंतःक्रिया करके सीखता है।

  10. ZPD की अवधारणा: ‘समीपस्थ विकास का क्षेत्र’ (Zone of Proximal Development) की अवधारणा वायगोत्स्की ने दी थी।

  11. पाड़ या ढांचा (Scaffolding): बच्चों को सीखने में दी जाने वाली अस्थायी मदद को स्केफोल्डिंग कहते हैं (वायगोत्स्की)।

  12. लॉरेंस कोहलबर्ग: इन्होंने ‘नैतिक विकास का सिद्धांत’ दिया, जिसमें 3 मुख्य स्तर और 6 चरण शामिल हैं।

  13. प्रयास एवं भूल का सिद्धांत: यह सिद्धांत ‘थार्नडाइक’ ने दिया था, जिसके लिए उन्होंने भूखी बिल्ली पर प्रयोग किया था।

  14. सीखने के मुख्य नियम: थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य नियम दिए हैं – 1. तत्परता का नियम, 2. अभ्यास का नियम, 3. प्रभाव का नियम।

  15. शास्त्रीय अनुबंधन: ‘शास्त्रीय अनुबंधन’ (Classical Conditioning) का सिद्धांत इवान पावलव ने दिया (कुत्ते पर प्रयोग)।

  16. क्रियाप्रसूत अनुबंधन: यह सिद्धांत ‘बी.एफ. स्किनर’ ने दिया, जिसमें उन्होंने चूहे और कबूतर पर प्रयोग किया था।

  17. सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत: गेस्टाल्टवादी ‘कोहलर’ ने यह सिद्धांत दिया (सुल्तान नामक चिंपांजी पर प्रयोग)।

  18. सामाजिक अधिगम: ‘सामाजिक अधिगम सिद्धांत’ (Social Learning Theory) अल्बर्ट बंडूरा ने दिया (बोबो डॉल प्रयोग)।

  19. बुद्धि का एक-कारक सिद्धांत: यह सिद्धांत ‘अल्फ्रेड बिने’ ने दिया था।

  20. द्वि-कारक सिद्धांत: बुद्धि का द्वि-कारक सिद्धांत (G-factor व S-factor) ‘स्पीयरमैन’ ने दिया।

  21. बहु-बुद्धि सिद्धांत: ‘बहु-बुद्धि सिद्धांत’ (Multiple Intelligence) हावर्ड गार्डनर ने दिया (इन्होंने 8 प्रकार की बुद्धि बताई)।

  22. बुद्धि का त्रि-आयामी (3D) सिद्धांत: यह सिद्धांत ‘जे.पी. गिल्फोर्ड’ ने प्रतिपादित किया था।

  23. मानसिक आयु (Mental Age): मानसिक आयु का संप्रत्यय सबसे पहले 1908 में ‘अल्फ्रेड बिने’ ने दिया था।

  24. बुद्धि लब्धि (IQ) का सूत्र: [IQ = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100] – यह सूत्र ‘लुईस टर्मन’ ने दिया था।

  25. सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching): सूक्ष्म शिक्षण प्रणाली के जनक ‘ड्वाइट डब्ल्यू. एलन’ (D.W. Allen) हैं।

  26. किंडरगार्टन विधि: इस बाल-केंद्रित शिक्षण विधि के जनक ‘फ्रॉबेल’ हैं।

  27. प्रोजेक्ट विधि: करके सीखने पर आधारित इस विधि के जनक ‘विलियम हर्ड किलपैट्रिक’ हैं।

  28. मोंटेसरी विधि: इस विधि की जनक ‘मारिया मोंटेसरी’ हैं, जिसमें ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से शिक्षा पर बल दिया जाता है।

  29. डिस्लेक्सिया (Dyslexia): यह विकार ‘पढ़ने की अक्षमता’ (Reading Disability) से संबंधित है।

  30. डिस्ग्राफिया (Dysgraphia): यह विकार ‘लिखने की अक्षमता’ (Writing Disability) से संबंधित है।

  31. डिस्केल्कुलिया (Dyscalculia): यह विकार ‘गणितीय गणना’ करने की अक्षमता से जुड़ा है।

  32. अफेज्या (Aphasia): यह विकार ‘भाषा और संप्रेषण’ (Communication) संबंधी अक्षमता है।

  33. RTE 2009 लागू होना: शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 पूरे भारत में 1 अप्रैल 2010 को लागू हुआ था।

  34. छात्र-शिक्षक अनुपात (प्राथमिक): RTE 2009 के अनुसार, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) पर 30 छात्रों पर 1 शिक्षक (30:1) होना चाहिए।

  35. छात्र-शिक्षक अनुपात (उच्च प्राथमिक): उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) पर यह अनुपात 35 छात्रों पर 1 शिक्षक (35:1) होना चाहिए।

  36. शिक्षक के कार्य घंटे: RTE 2009 के तहत शिक्षकों के लिए प्रति सप्ताह न्यूनतम कार्य घंटे ’45 घंटे’ (तैयारी के घंटों सहित) निर्धारित हैं।

  37. NEP 2020 का ढांचा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का नया शैक्षणिक ढांचा ‘5+3+3+4’ प्रणाली पर आधारित है।

  38. समावेशी शिक्षा: इसका अर्थ है – सामान्य और विशेष आवश्यकता (दिव्यांग) वाले बच्चों को एक ही छत के नीचे एक साथ शिक्षा देना।

  39. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE): इसका मुख्य उद्देश्य केवल अंक देना नहीं, बल्कि बच्चों के ‘सर्वांगीण विकास’ का आकलन करना है।

  40. NCF 2005 का सिद्धांत: NCF 2005 ‘रटंत प्रणाली’ से मुक्त होकर ‘करके सीखने’ (Learning by doing) पर बल देता है।

  41. शिक्षक की भूमिका: NCF 2005 के अनुसार कक्षा में शिक्षक की भूमिका एक ‘सुविधादाता’ (Facilitator) की होनी चाहिए।

  42. बाल-केंद्रित शिक्षा: बाल-केंद्रित शिक्षा (Child-Centered Education) का मुख्य समर्थक ‘जॉन डीवी’ को माना जाता है।

  43. ब्रेल लिपि: दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ‘ब्रेल लिपि’ का आविष्कार लुई ब्रेल ने किया, यह 6 बिंदुओं (Dots) पर आधारित होती है।

  44. क्रियात्मक अनुसंधान: विद्यालयी समस्याओं के तुरंत समाधान के लिए ‘क्रियात्मक अनुसंधान’ (Action Research) किया जाता है, जिसके जनक स्टीफन एम. कोरे हैं।

  45. व्यक्ति-अध्ययन (Case Study): इस विधि का प्रयोग मुख्य रूप से समस्यात्मक बालकों के कारणों का पता लगाने के लिए किया जाता है।

  46. सामान्य बुद्धि (Average IQ): जिस बच्चे की बुद्धि लब्धि 90 से 109 के बीच होती है, उसे ‘सामान्य बुद्धि’ का माना जाता है।

  47. प्रतिभाशाली बच्चे (Gifted): प्रतिभाशाली बच्चों की बुद्धि लब्धि (IQ) 130 या 140 से अधिक होती है।

  48. प्रत्यागमन का नियम: आनुवंशिकता के इस नियम के अनुसार प्रतिभाशाली माता-पिता की संतान मंदबुद्धि या मंदबुद्धि माता-पिता की संतान प्रतिभाशाली हो सकती है।

  49. संवेग (Emotion): मैकडूगल के अनुसार कुल 14 मूल प्रवृत्तियां (Instincts) होती हैं और हर प्रवृत्ति से एक संवेग जुड़ा होता है।

  50. समाजीकरण (Socialization): परिवार बच्चे के समाजीकरण की ‘प्राथमिक संस्था’ (Primary Agency) है, जबकि स्कूल और मीडिया ‘द्वितीयक संस्था’ (Secondary Agency) हैं।

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