अगर कश्मीर का यही हाल रहा तो वो दिन दूर नही जब...


भारत धर्मनिरपेक्ष देश है जहाँ पर सभी धर्मों के लोगो को समान रूप से रहने फैलने फूलने का अधिकार है। इसीलिए कहा जाता है कि भारत देश एक गुलदस्तें के रूप में है जिसमें तरह तरह के फूल लगे होते हैं। गुलदस्तें में जब तरह तरह के फूल लग जाते हैं तो गुलदस्तें की खूबसूरती बढ़ जाती है।
जिस तरह विभिन्न फूलों से सजे गुलदस्तें की रौनक बढ़ जाती है उसी तरह से विभिन्न धर्मों को मानने वाले जब भारत रूपी गुलदस्तें में एक साथ रहते हैं तो देश का गौरव बढ़ जाता है। हमारे देश की विविधता में एकता ही हमारी एकता एकजुटता राष्ट्रीयता की प्रतीक होती है। हमारे देश की विशेषता है कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और सभी को बराबर फैलने फूलने का अवसर मिलता है।
हमारी एकता एकजुटता राष्ट्रीयता का ही परिणाम है जो हमें अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिल सकी। आजादी की लड़ाई में सभी धर्मों सम्प्रदायों के लोग शामिल थे किन्तु उनकी पहचान धर्म से नहीं बल्कि भारतीय के रूप में होती है। आजादी मिलने के बाद से ही जम्मू काश्मीर एक ऐसा राज्य था जिसने हमारे धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बदलने की शुरुआत हिन्दुओं को राज्य से बाहर निकालने के साथ हो गयी थी।
आज जम्मू काश्मीर में हिन्दुओं की संख्या न के बराबर हो गयी है और वहीं हिन्दू वहाँ पर बचा है जो काश्मीरियों के रंग में रंग गया है और जो वह चाहते हैं उसका विरोध नहीं करता है। काश्मीर से हिन्दुओं को भगाकर उसे इस्लामिक राज्य बनाने का ख्वाब देखा जा रहा है। अबतक जम्मू काश्मीर में ही धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को कुरूप किया जा रहा था लेकिन अब इसका विस्तार होता जा रहा है।
केरल व पश्चिम बंगाल इसका जीता जागता उदाहरण है। केरल व बंगाल में जिस तरह का व्यवहार हिन्दुओं के साथ किया जा रहा है अगर उसी पर तत्काल गौर न किया गया तो जम्मू काश्मीर के हिन्दुओं जैसी दशा इन राज्यों में भी हो सकती है। एक आतंकवादी बुरहानी के मारे जाने पर जम्मू काश्मीर में तूफान आ जाता है लेकिन जब अमरनाथ यात्रियों पर हमला होता है तो विरोध प्रदर्शन नहीं होता है।
जबतक राष्ट्रविरोधी ताकतों का महिमा मंडप होना बंद नहीं होता है तबतक हमारी धर्मनिरपेक्षता अक्षुण्ण नहीं रह सकती है। बंगाल में जिस तरह का बर्ताव धर्म विशेष के साथ धर्म विशेष द्वारा किया जा रहा है उससे वहाँ के अल्पसंख्यकों की जान खतरे में हैं। सरकार धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बिगाड़ने वालों के साथ सख्ती न करके उन्हें बढ़ावा दे रही है। अगर यहीं हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं हैं जबकि जम्मू काश्मीर की तरह वहाँ से धर्म विशेष के लोगों का पलायन शुरू हो जायेगा।
यहीं हाल केरल का है वहाँ पर भी अल्पसंख्यक धर्म विशेष के लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है वह जम्मू काश्मीर से कम नहीं है। हिन्दुस्तान और उसके राज्यों की खूबसूरती तभी तक सुरक्षित है जबतक कि इसका धर्मनिरपेक्ष स्वरूप बना हुआ है। सरकार का दायित्व बनता है कि वह वोट की राजनीति से ऊपर उठकर हमारे धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाये रखें। जो लोग हमारे धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बिगाड़ना चाहते हैं उनके अरमानों को रौद दिया जाय और ऐसी नसीहत दी जाय कि आने वाली पीढ़ी उसे याद रखे।
              भोलानाथ मिश्र
   वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी 
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