‘गौरक्षा’ की तरह स्वच्छ भारत अभियान भी मुसलमानों के लिए बनेगा जानलेवा?



हरियाणा के मेवात के नूह के डीसी हैं मणिरामन् राम, इसी सप्ताह उन्होंने मेवात के किसी गांव पर धावा बोलकर उन लोगो को गिरफ्तार किया जो खुले में शौच कर रहे थे। उनकी फोटो उन्होंने सोशल मीडिया पर डाली और इस तरह अपनी बहादुरीदिखाई मानो उन्होंने बहुत बड़े अपराधियों को पकड़ लिया हो। इतना ही नहीं डीसी महोदय ने उस फोटो पर जो टिप्पणी लिखी वह भाषा किसी आईएएस की न होकर बल्कि जाहिल, गंवार, इंसानों को भाषा लग रही थी। उनकी टिप्पणी पर मेरे जैसे कुछ लोगों ने विरोध भी जताया लेकिन वाह वाही के नक्कार खाने में हमारा विरोध तूती की तरह दबकर रह गया।

मणिरामन ने फेसबुक पर एक दूसरी पोस्ट की जिसमें उन्होंने लिखा कि कुछ लोगों को मेरी भाषा से आपत्ती है लेकिन उन्हें क्या मालूम कि मैं जब बोलता हूं तो दस शब्दों में कमसे कम आठ गालियां देता हूं। इस टिप्पणी ने बीबीसी का ध्यान आकर्षिक किया और फिर स्टोरी तैयार की गई। मणिराम् तो अपनी बहादुरीदिखा चुके थे अब बारी चेलो की थी। मगर वे चेले पड़ोस के ही राज्य राजस्थान में पाये गये।
राजस्थान के प्रतापगढ़ में प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारतअभियान के तहत जफर खान की हत्या कर दी, जफर के घर की महिलाऐं जंगल में शौच के लिये गईं थी, वहां पर स्वच्छ भारत अभियान के लठैतों ने शौच करती उन महिलाओं के फोटो लेने शुरु कर दिये, जफर ने इसका विरोध किया तो उसे वहीं पीट पीट कर मार डाला। यह मोदी जी का स्वच्छ भारत अभियान है। जिसे मणिराम जैसे आईएएस ऑफिसर हवा देते हैं, और फिर उनके लठैत हत्या तक कर देते हैं।
मालूम नहीं किस स्वच्छ भारत की बात हो रही हैं, जिनके दिमागों में ही पाखाना भरा हो वे स्वच्छ भारत कैसे बनायेंगे ? शौच करती महिलाओं के फोटो लेना कौनसे स्वच्छ भारत का हिस्सा है ? फिर उनकी इस करतूत का विरोध करने वाले की हत्या कर देना कौनसा स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा यह आप आसानी से समझ सकते हैं। मेरे पत्रकार दोस्त Arvind Shesh ने इस हत्या पर लिखा है कि मुझे नहीं पता कि जफ़र खान की हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने प्रिय स्वच्छ भारतप्रोग्राम पर खुश होंगे या शर्म से एक बार आईने में देखेंगे कि उनका स्वच्छ भारतकिस कदर हत्यारा हो गया है!

वसीम अकरम त्यागी
लेखक पड़तालडट.कॉम के एडिटर है

मुझे यह भी नहीं पता कि जिन महिलाओं को सोने तक के लिए ढाई गज जगह नहीं होगी, उनके खुले में शौच करने जाने से मोदी के किस सपने को शर्म आ रही थी। जब सरकारी कर्मचारी खुले में शौच करती महिलाओं की फोटो खींच रहे थे तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वच्छ भारतके इस हमले पर शर्म करना जरूरी समझा होगा ? शौच करती महिलाओं की फोटो खींचने से रोकने वाले बुजुर्ग जफ़र खान को जब पीट-पीट कर मार डाला गया, तो उसके बाद किसको-किसको शर्म आई ?

ये कैसा समाज बना दिया आपने मोदी जी…! अगर हकीकत को देख सकने की सलाहियत नहीं है, गुंडों और सरेआम के हत्यारों को कंट्रोल करने की क्षमता नहीं है तो किसी बात की मुनादी क्यों कर देते हैं आप! क्या आप ये चाहते हैं कि इस देश के लोग जॉम्बी बन जाएं, जिंदा ड्रैकुला, जो पहले अपने आसपास वालों को जिंदा चीड़-फाड़ कर खाता है फिर सबके खत्म हो जाने के बाद खुद को ही चीड़-फाड़ कर खाने लगता है! क्या आप चाहते हैं ऐसा?
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