अमेठी: अफसरों की मनमानी का शिकार हुआ मायावती का ड्रीम प्रोजेक्ट


शिवकेश शुक्ला
अमेठी सरकार भले ही विकास योजनाओं में पारदर्शिता की बात करती हो लेकिन धरातल पर उसे लागू करने को लेकर अधिकारी तनिक भी गंभीर नहीं है कांसीराम आवास योजना भी अधिकारियों, कर्मचारियो तथा नगर पँचायत अध्यक्ष की मनमानी का शिकार हो रही है ।
कभी मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल मान्यवर कांशीराम आवास योजना आज योगीराज में अपने उद्देश्य से भटकती दिख रही है आवासों के आवंटन में मानक और पात्रता को नजरंदाज  किए जाने को लेकर शिकायतों की लंबी फेहरिश्त अमेठी जिलाधिकारी योगेश कुमार को भेजी गयी है नगर वासियो का आरोप है कि मुसाफिरखाना में अधिकारियो के साथ सेटिंग के खेल ने कभी गरीबों के निवाले को निगलने कोशिश की तो वही आज उनका आसरा छीनने की कोशिश हो रही है जी हां! ऐसे हैं अमेठी के मुसाफिरखाना के नगर पँचायत अध्यक्ष जो अब गरीब की छत का भी कर रहे हैं सौदा।

नगर पंचायत वासियो ने लगाया ये आरोप-
कांसीराम आवास योजना के आवंटन को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मुसाफिरखाना ने अपने जानने वालों को आवंटन फार्म उपलब्ध  कराए हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आरोप ऐसे ही नहीं लग रहे बल्कि अपने खास लोगों को इन आवासों के लिए की फार्म का आवंटन हुआ हैं।

गुप चुप तरीके से कराया गया आवेदन फार्म का वितरण-
स्थानीय लोगो का आरोप है कि लाभार्थियों को इस योजना की जानकारी न तो लाउड स्पीकर द्वारा करायी गयी और न ही सभासदो की बैठक बुलाई गयी । सिर्फ अपने को लाभ पहुचाने के लिए ही सूचना को सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा   नही किया गया । इस मामले को लेकर समाजसेवी व नेता नकुल टण्डन ने जिलाधिकारी अमेठी से  कांसीराम आवास योजना मुसाफिरखाना में हुई अब तक कार्यवाही को निरस्त करके निष्पक्ष व सार्वजनिक ढंग से सिर्फ पात्रो को ही आवास वितरण कराये जाने की माँग की है 
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