किसान मुफ़्तखोर नहीं आप बेगैरत जलील और मरे हुए इंसान हैं

हमारा खेत जो करता है बटाई पर उसका नाम बंदू है । बुंदेलखंड लगातार सूखे से जूझ रहा है । बारिश आती है तो कभी बेइंतिहा आ जाती है , ओले ,आंधी तूफान से किसान दो चार होता रहता है ।
बंदू लगभग 25 सालों से हमारा खेत देख रहा है । उसके खुद भी खेत हैं ठीक ठाक आर्थिक स्थिति भी है । लेकिन दो साल पहले जब फसल पक गई थी तो तेज़ आंधी और ओले से सब तबाह हो गयाष खेत ओलों से पट गए थे ।
अपने पसीने और खून से सींची गई फ़सल एक दिन में ज़मीन से मिल गई । किसान अपने बच्चों की तरह फसल की देखभाल करता है और अगर एक पल में सब तबाह हो जाए तो वो बर्दाश्त नहीं कर पाता है ।
खेतों की हालात जब बंदू ने देखी तो उसे हार्ट अटैक अा गया वो भी मेजर। बड़ी मुश्किल से जान बची ।
हालांकि भक्त कह सकते हैं कि किसान को हार्ट अटैक नहीं आता है । ये तो अमीरों की बीमारी है । बंदू आर्थिक रूप से मज़बूत है लेकिन वो किसान है जो रोजाना जूझता है मेहनत करता है । वो बैठकर कोई और रोज़गार कर सकता है लेकिन किसानी उसकी ज़िंदगी है ।
जो अपने हक़ के लिए नहीं लड़ सकता है । जो अपने मालिक के सामने मुंह नहीं खोल सकता है , जो दूसरों की गुलामी करता है वो किसानों को ज्ञान दे रहा है कि किसान मुफ्तखोर है । किसान मुफ्तखोर  नहीं आप बेग़ैरत हैं, आप ज़लील और मरे हुए इंसान हैं ।
साभार Nida Raman की फेसबुक वॉल से
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