सिस्टम, सियासत और मेरी क़ौम...?



आज हम बात कर रहे हैं उस अज़ीम क़ौम की जिसने कभी सिकन्दर बन कर पूरी दुनियां पर हुक़ूमत करी तो कभी टीपू सुल्तान बन कर हिंदोस्तान से कई बार अंग्रेज़ो की गुलामी से दूर रखा| तो कभी औरन्गज़ेब बन कर मुल्क को इज़्ज़त बख्शी..वो कभी अबुल कलाम बन कर रेहनुमाई करते नज़र आये तो कभी वीर अब्दुल हमीद बन कर मुल्क के रेहबर बने,तो कभी अश्फ़ाक उल्ला जैसे योद्धा रहे,कहीं तो मीर ताज खाँ बन कर सामने आये तो कभी सर सैय्यद बन कर अंग्रेज़ से लोहा लिये,कहीं वो एपीजे अब्दुल कलाम बन कर हिंदोस्तान की शान बने..नाम इतने हैं तुम्हारे की फ़ेसबुक भी कम पड़ जाये..

पर क्या आज हम अपने बीच ये नाम पाते हैं नहीं क्यों नहीं पाते??

अब बात आप की समझ से परे है तो दिमाग पर ज़ोर दो और सिस्टम क्या है उसे जानो..सिस्टम का सिर्फ़ हिस्सा मत बनो बल्कि खुद एक सिस्टम बनो..

आज का मुसलमान कभी नरेन्द्र मोदी का विरोध करता नज़र आता है तो कभी योगी महाराज का अरे भईया विरोध करके क्या उखाड़ लिये तुम??

तो सुनो तुम जिसका विरोध करोगे वो उतना मज़बूत ही होगा अगर यकीन नहीं तो किसी और का भी विरोध करके देखो..

अब तुम्हें मीडिया से शिकायत है तो खुद पत्रकार बनो..

अगर पुलिस से शिकायत है तो खुद पुलिस बनो..

जजमेंट से दिल नहीं ठुकता तो अपनी औलाद को जज बनाने की ठानो..
तालीमगाह खोलो अपने स्कूल खोलो अपनी ज़ुबान ज़िन्दा रखो,अपनी तहज़ीब ज़िन्दा रखो अगर ये ज़िन्दा रहेगा तो ईमान ज़िन्दा रहेगा और ईमान ज़िन्दा रहेगा तो तुम ज़िन्दा रहोगे...

एक शेर साथ अपनी बात को खत्म करता हूँ

पहले तालीम से तुम मोड़ दिये जाओगे..
फिर किसी जुर्म से जोड़ दिये जाओगे..
हाथ से हाथ की कड़ी बना कर निकलो..
वरना धागे की तरह तोड़ दिये जाओगे..


अनस कुरैशी की फेसबुक वॉल से
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