शर्म करो इंसानों! बेटियों को जिंदा दफ़न क्यों कर रहे हो?



ज़माना ए जाहिलियत में लोग अपनी बेटियों को ज़िंदा ज़मीन में दफन कर देते थे ये लोग बच्ची के हाथ मे मिठाई का टुकड़ा थमा देते थे इसके बाद हाथ मे गुड़िया थमाकर उसे कब्र में बैठा देते थे बच्ची इसको खेल समझती और कब्र में गुड़िया और मिठाई के टुकड़े से खेलने लगती ये लोग तब उसपर मिट्टी डालना शुरू कर देते बच्ची शुरू में इसको भी खेल समझती लेकिन जब मिट्टी उसकी गर्दन तक जा पहुंचती तो वो घबराकर अपनी मां को पुकारना शुरू कर देती चीखती चिल्लाती और मन्नते करती लेकिन ज़ालिम बाप उस बच्ची को ज़िंदा दफन कर देता इस घिनौने काम के बाद जब वो घर आता तो बच्ची की चीखें घर तक उसका पीछा करतीं लेकिन इन जालिमो के दिलो पर ताले पड़े हुए थे जो नरम नही होते थे
कुछ लोग ऐसे भी थे जिनसे ये गुनाह उनके इस्लाम कबूल करने से पहले सरज़र्द हो चुका था उनमे से एक साहाबी रज़ि. ने अपना वाक्या सुनाया के जब वो अपनी बेटी को उंगली पकड़ कर दफनाने ले जा रहा था
तब बच्ची ने मेरी उंगली पकड़ रखी थी वो बाप के साथ की वजह से खुश हो रही थी वो सारे रास्ते मुझसे बाते करती रही और अपनी तोतली ज़ुबान से बोलती रही मैं सारे रास्ते उसको और उसकी फरमाइशों को बहलाता रहा मैं उसको लेकर कब्रिस्तान पहुंच गया और उसके लिए कब्र की एक जगह तय की मैं ज़मीन पर बैठ गया और अपने हाथों से रेत उठाने लगा मेरी बेटी ने मुझे काम करते देखा तो वो भी काम करने लग गई वो भी अपने नन्हे हाथों से मिट्टी खोदने लगी हम दोनों बाप बेटी मिट्टी खोदते रहे उस दिन मैंने साफ कपड़े पहने हुए थे रेत खोदते वक्त मेरे कपड़ो पर मिट्टी लग गई मेरी बच्ची ने उठकर मेरे कपड़े साफ किये मैं उसके लिए कब्र तैयार कर रहा था और वो मेरे कपड़े साफ कर रही थी कब्र तैय्यार हुई तो मैंने उसे कब्र में बैठा दिया और मिट्टी डालनी शुरू की वो भी अपने नन्हे हाथों से अपने ऊपर मिट्टि डालने लगी वो मिट्टी डालती जाती थी और साथ साथ कहकहे लगाती जाती थी और फरमाइशें करती जाती थी लेकिन मैं दिल ही दिल में अपने झूठे खुदाओं से दुआ कर रहा था कि मुझे बेटा दे आखिर में जब मैंने उसके सिर पर मिट्टी डालनी शुरू की तो उसने मुझे ख़ौफ़ज़दा नज़रो से देखा और कहा
अब्बा आपपर मेरी जान कुर्बान आप मुझे क्यों दफन करना चाहते हैं ?
मैने अपने दिल को पत्थर सा बना लिया और अपने दोनों हाथों से मिट्टी मज़ीद तेज़ी से फेंकना शुरू कर दी
मेरी बेटी चीखती रही रोती रही दुहाइयाँ देती रही लेकिन मैंने उसको कब्र में जिंदा दफन कर दिया
ये वो लफ्ज़ थे जहां रहमतुल लिल आलमीन जनाबे मुहम्मदुर रसूलुल्लाह सल्ल. का ज़ब्त भी जवाब दे गया और आप सल्ल की हिचकिया बन्ध गई दाड़ी मुबारक आंसुओ से तर हो गई और आवाज़ गोला बनकर हलक में फंसने लगी वो शख्स दहाड़े मार मार के रो रहा था और आप सल्ल. हिचकिया ले रहे थे ....
आजके दौर के लोग कहते हैं वो लोग कितने ज़ालिम और जाहिल थे लेकिन अपने ज़माने को नही देखते इस दौर में ये ही काम उस दौर से ज़्यादा हो रहा है फर्क बस इतना है वो लोग जाहिल थे और अपनी बेटियों को पैदा होने के बाद ज़िंदा ज़मीन में दफन कर देते थे जबकि इस दौर में लोग पड़े लिखे हैं और अपनी बेटियों को पैदा होने से पहले ही एबॉर्शन के ज़रिए कत्ल करके ज़िंदा दफन कर रहे हैं !!!


Jilani Ansari की फेसबुक वॉल से
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