भयंकर बुलबुले फुलाए जाने की तैयारी हो रही है सावधान बुलबुले फूटते जरूर हैं

कल रिजर्व बैंक ने बैंकों को होम लोन देने के लिए ज़रूरी पूँजी की मात्रा को घटा दिया और कर्ज डूबने की स्थिति में नुकसान को झेलने की व्यवस्था के लिए रखी जाने वाली राशि (provision) को भी कम कर दिया| अब बैंक कम पूँजी रख कर ज़्यादा होम लोन दे सकते हैं अर्थात ब्याज दर में थोड़ी और कमी करेंगे|
1990 के समय से आर्थिक वृद्धि के संकट से निपटने की यही नीति अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व ने अपनाई थी और 2001 के वित्तीय संकट के बाद तो बैंकों के लिए होम लोन देने की लागत बहुत ही कम कर दी थी| खूब होम लोन दिए गए, तो खूब मकान बनाये-ख़रीदे भी गए! इसके बल पर सबको अर्थव्यवस्था में तेजी दिखाई भी दी| 
पर लिया हुआ कर्ज कभी तो चुकाना ही पड़ता है, आमदनी के बगैर वह होता नहीं; आमदनी रोज़गार के बिना नहीं बढ़ती! यह बात बड़ी सीधी सी है लेकिन प्रचार की चकाचौंध में अक्सर समझ में नहीं आती| तो बुलबुला फूटना था, 2008 में आकर फूटा जिसका ख़मियाजा दुनिया भर के गरीब लोगों ने भुगता, बुलबुला फुलाने वालों ने नहीं|
अब जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था में तेज़ी के प्रचार का बुलबुला फूट रहा है, होम लोन बढ़ाने की कवायद से और भी बड़ा, भयंकर बुलबुला फुलाये जाने की तैयारी हो रही है| पर बुलबुले फूटते जरूर हैं!
ख़बरदार रहना जरुरी है!
Mukesh Tyagi की फेसबुक वॉल से
Previous Post Next Post

POST ADS1

POST ADS 2