अटल केन्द्र में तपते रहे ग्रामीण और मंत्रीजी फोर्ट में बैठे रहे


एसपी मित्तल
सब जानते हैं कि जल स्वावलंबन अभियान राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। प्रदेश भर में खासकर ग्रामीण क्षेत्र में पुराने परम्परागत जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इस काम में आर्थिक सहयोग भी संबंधित जिले के भामाशाहों से लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आगामी 9 जून तक जल स्वावलंबन सप्ताह बनाने के निर्देंश दिए हैं। इसी के अंतर्गत 7 जून को अजमेर जिले के प्रभारी मंत्री हेम सिंह भडाना ने रूपनगढ़ क्षेत्र के कामों का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने निर्देंश दिए हैं कि प्रभारी मंत्री स्वयं मौके पर जाकर कामों को देखेंगे और जिन भामाशाहों ने आर्थिक सहयोग किया है, उन्हें सम्मानित करेंगे। 7 जून को प्रभारी मंत्री भड़ाना रूपनगढ़ आए तो सही, लेकिन उनका अधिकांश समय रूपनगढ़ फोर्ट में ही व्यतीत हुआ। दोपहर 12 बजे रूपनगढ़ पहुंचने पर भड़ाना ने सुरसुरा गांव में एक जल संरक्षण के काम को देखा और फिर रास्ते में अन्य कामों पर नजर दौड़ाते हुए रूपनगढ़ के फोर्ट में चले गए। मंत्री के साथ नगरीय विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव और अजमेर के प्रभारी सचिव मुकेश शर्मा, विधायक भागीरथ चौधरी, जिला प्रमुख सुश्री वंदना नोगिया एवं जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी भी थे।
चूंकि इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है, इसलिए मंत्री और आला अधिकारियों ने हैरिटेज होटल में तब्दील हुए फोर्ट में ही अधिकतम समय बिताना ही उचित समझा। स्वाभाविक था कि मंत्रीजी का लंच भी फोर्ट में ही रखा गया। इधर एसी में मंत्रीजी विश्राम और लंच कर रहे थे, तो उधर रूपनगढ़ ग्राम पंचायत के अटल सेवा केन्द्र में ग्रामीण भीषण गर्मी में बैठे हुए थे। वाटर शेड विभाग के इंजीनियरों ने भामाशाहों को भी अटल सेवा केन्द्र पर ही दोपहर 2 बजे आमंत्रित किया। एलएनटी, अडानी, जीवीके जैसे संस्थानों के प्रतिनिधि मंत्रीजी से सम्मानित होने के लिए 2 बजे पहुंच गए। इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि बड़े भामाशाहों से 4-4 लाख रुपए लिए जा रहे हैं। वहीं अटल सेवा केन्द्र पर भामाशाहों के बैठने तक के इंतजाम नहीं थे। भीषण गर्मी में एक गिलास ठंडा पानी पिलाने की बात तो बहुत दूर की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक बार कहा है कि मंत्री और विधायक जनसेवक हैं। यानि जनता के नौकर। लेकिन 7 जून को रूपनगढ़ में नौकर तो फोर्ट में बैठे रहे और मालिकरूपी जनता अटल केन्द्र में तपती रही। हालात इतने खराब थे कि अनेक भामाशाह सम्मानित हुए बिना ही वापस आ गए। अब किसी भी भामाशाह में इतनी हिम्मत नहीं कि वह कोई विरोध कर सके। आखिर उन्हें इन्हीं प्रभारी मंत्री के जिले में अपना कारोबार करना है। जब लाखों रुपया दान देने वाले भामाशाहों का यह हाल रहा तो आम ग्रामीणों के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। फोर्ट से निकल कर जब ग्रामीणों के बीच मंत्री और अधिकारी आए तो उन्होंने सिर्फ खानापूर्ति ही की। मंत्री और किसी भी अधिकारी की रूचि भीषण गर्मी में अटल केन्द्र के परिसर में बैठने की नहीं थी। 
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