पत्रकारिता चाटुकारिता और दलाली से अंधकारमय हो गयी - चाँद फरीदी


लखनऊ। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को जब फ़िल्म इंडस्ट्री में कोई खड़े होने का वक़्त नही देता था, तो उस समय के मशहूर पत्रकार, लेखक और निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास ने अपनी एक फ़िल्म "सात हिंदुस्तानी" में मौका दिया था, औऱ इसके बाद अमिताभ को फिल्मे मिलने लगी, औऱ यही से शुरू हुआ अमिताभ का सफर औऱ जिसके बाद स्टार, सुपरस्टार औऱ महानायक के तौर पर आज लाखो करोंङो दिलो पर राज कर रहे है, अमिताभबच्चन।
   सात जून 1914 (पानीपत, हरियाणा में जन्म औऱ एक जून 1987 को मुम्बई, महाराष्ट्र मे मर्त्यु हुई) को ख्वाजा अहमद अब्बास साहब के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सयुंक्ताक रूप से आधा दर्जन पत्रकार संघठनो ने गाँधी प्रतिमा, जीपीओ हज़रतगंज, लखनऊ में उत्तर प्रदेश में *पत्रकार सुरक्षा कानून*  लागू करने के लिए धरना प्रदर्शन किया, धरना- प्रदर्शन की अध्यक्षता श्री चाँद फरीदी (अध्यक्ष -"आल इंडियन रिपोर्टर्स एसोसिएशन" आईरा- यूपी) ने किया। श्री फरीदी ने अपने सम्बोधन में ख्वाजा अहमद अब्बास की चर्चा करते हुए कहा कि अब्बास साहब ने दिल्ली से प्रकाशित नेशनल सेल से शुरुआत किया,इसके बाद अलीगढ़ ओपिनियन नाम से वीकली मैगज़ीन निकाला, जो भारत की पहली यूनिवर्सिटी छात्रो की मैगज़ीन थी, लगभग 73 किताबे हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू लिखकर अपने वजूद का इतिहास स्वयं रच कर पत्रकारिता के लिये नए आयाम रच दिए।
  ख्वाजा अहमद अब्बास साहब के जनदिन पर महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में *पत्रकार सुरक्षा कानून* लागू करने के लिये काफ़ी दिनों से मांग की जा रही है परंतु सरकार की हीलाहवाली के चलते सात जून को सयुक्तांक आधा दर्जन पत्रकार संगठन ने सरकार पर दबाव बनाते हुए धरना प्रदर्शन कर एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को प्रशासन के माध्यम से प्रेषित किया गया, ज्ञापन में मुख्यता *पत्रकार सुरक्षा कानून, मीडिया आयोग, मीडिया काउंसिल* बनाने तथा लघु व मध्यम पत्र पत्रिकाओ की समस्यो पर गौर करने का अनुरोध किया गया है।श्री फरीदी ने कहा कि कुछ पत्रकारों ने पत्रकारिता की छबि इस कदर धूमिल कर दिया है, जिससे लगभग सम्मस्त मीडिया जगत चाटूकरिता औऱ अंधकारमय हो चुका है, जिसके चलते बड़े और सीनियर तो मौज कर रहे है परन्तु ग्रामीण क्षेत्र का पत्रकार अपराध, भ्रस्ठाचार, गन्दी राजनीति ओर माफियाओं का शिकार हो रहा है।प्रदेश सरकार शीघ्र *पत्रकार सुरक्षा कानून* लागू करे।
  "जन जर्नलिस्ट एसोसिएशन" के प्रदेश प्रभारी मोहम्मद मोईद खान ने कहा कि देश मे मीडियाकर्मियों पर लगातार हमलो से पत्रकारों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। पत्रकारों की सुरक्षा के लिये तुरंत कानून बनाने की ज़रूरत है। "अखिल भारतीय युवा पत्रकार संघ" के राष्ट्रीय अध्यक्ष अलीम क़ादरी ने कहा कि मीडिया काउंसिल औऱ मीडिया कमीशन का गठन जल्द होना चाहिए, श्री कादरी ने कहा कि एक साल में 200 से अधिक पत्रकारों पर हमले और हत्या हुई है, चिंता की बात यह हैं कि पत्रकारो के कातिलो को पकड़ा नही जा सका है।
"नेशनल राइटर यूनियन पत्रकार संगठन" के अध्यक्ष इक़रार अंसारी ने कहा कि मैं भुक्तभोगी हु मेरे ऊपर जानलेवा हमला हुआ, पुलिस ओर हमलवारो की मिलीभगत के चलते हमलावर खुलेआम घूम रहे है, ऐसी स्थिति हर घटना में देखने को मिलती है, इसलिए प्रदेश में शीघ्र सुरक्षा कानून लागू हो।
   प्रतिनिधिमण्डल में "आल इंडियन रिपोर्टर्स एसोसिएशन" आईरा, "सेंट्रल प्रेस काउंसिल", "प्रेस वेलफ़ेयर एसोसिएशन", "अखिल भारतीय युवा पत्रकार" औऱ जन पत्रकार संगठन के सदस्य आफाक अहमद मंसूरी, नवाज़ खान, निर्वाण पाण्डे, हुसैन अहमद, डाक्टर हुसैन, कपिल यादव, हिमांशु सक्सेना, मलिक सईद, राशिद सिद्दकी, मोईद खान, डाक्टर एस ए अज़ीज़, नोंशाद, मुदास्सिर किदवाई, आलोक त्रिपाठी, बसन्त शर्मा औऱ मोहित, सहित दर्जनों पत्रकारो ने एक आवाज़ के साथ धरना प्रदर्शन में अपनी सहभागिता दर्ज करायी।
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