कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है,कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यूँ नहीं जाते?

Noor N Sahir
हम सब देख रहे हैं कि देश के हालात क्या हैं? हमारे देश में जानवरों का पेशाब पिया जा रहा है और इन्सानों को मारा जा रहा है। हमारे मुल्क के लीडर ख़ुद ख़ूबसूरत लड़कियों के साथ सेक्स करते हैं और अवाम के लिए पाबन्दी लगाते हैं, एंटी रोमियो के ज़रिये। ख़ैर.... एंटी रोमियो मेरा मौज़ूअ नहीं है। क्यूँकि ये फ़ुज़ूल है। बहुत पुरानी कहावत है जो जैसा होता है औरों को भी वैसा ही बनाना चाहता है, ख़ुद भी सन्यासी तो सारा मुल्क सन्यासी होना चाहिए।
रोज़ कहीं न कहीं कोई न कोई रेप हो जाता है लेकिन हमारे जहाँ पनाह को कोई फ़र्क़ नहीं है। रोज़ कहीं न कहीं कोई क़त्ल हो जाता है मगर हमारे जहाँ पनाह को कोई मतकब नहीं है।
और यार फ़र्क़ होगा भी क्यूँ? वो तो बड़े मज़े में हैं। उन का नाश्ता अमेरिका तो दुपहर का खाना लन्दन में और शाम की चाय आस्ट्रेलिया में और रात का खाना न्यूज़ीलैंड में होता है।
हाल ही में एक मुसलमान रोज़ेदार औरत का रेप एक वर्दी वाले शैतान ने करा दिया। कुछ दिनों तक हंगामा हुआ और फिर केस वहीँ का वहीं दब गया और अब शायद कभी न खुले। क्यूँकि वो औरत मुसलमान थी और वर्दी वाला हिन्दू। पहले भी कोई कमलेश तिवारी नाम का कुत्ता मोहम्मद (स.अ.व.) की तौहीन कर चुका है। कुछ दिनों तक विरोध हुआ फिर कोई कार्यवाही नहीं हुई। और इत्तेफ़ाक़ से उस कुत्ते का नाम "कमलेश तिवारी" और इस शैतान का नाम "कमलेश शुक्ला" है।
दोनों ने मुलमानों की आबरू रेज़ी की इस लिए दोनों आज़ाद हैं। और अगर कोई मुसलमान इस के बरअक्स करता जैसे हिन्दू लड़की साथ रेप करता तो उसे पता भी लगने दिया जाता कि कहाँ गया? जैसा कि नजीब के साथ हुआ। आज तक नजीब का पता नहीं चला। पता है क्यूँ? क्यूँकि वो मुसलमान था। यू.पी. में रोज़ रमज़ान में ठीक इफ़्तार के वक़्त बिजिली चली जाती है। पता है क्यूँ? क्यूँकि ये मुसलमानों के इफ़्तार का वक़्त होता है। और जब से रमज़ान शुरू हुआ है तभी से बिजिली का ड्रामा शुरू हुआ है।
आज हमारे हिंदुस्तान में सब से ज़्यादा ज़ुल्म मुसलमानों ही पे हो रहे हैं। लेकिन कोई कुछ नहीं बोलता। हमारे मुल्क में मज़हब क नाम पर फ़साद फैलाया जा रहा है लेकिन हम में से कुछ कमसमझ लोग नहीं समझते ये राजनीति. मोदी के कुछ अंतधभक्त तो ऐसे हैं कि; "अगर मोदी जी उन्हें गिरा गिरा के मारें फिर भी उफ़ न करें"
यार! ऐसी अंधभक्ति भाड़ में जाए।
बस आख़िरी बात.... हमारे यहां की कहावत है कि; "नंगे को मिल गई पीतल, बार धरै या भीतर" वही हुआ। उन लोगों को कुर्सी मिल गई जो चटाई पे भी बैठने लाइक़् न थे। अब बर्बादी तो होगी देश की, लाज़िमी है। और फिर चाहे प्रधानमन्त्री हों या मुख्यमंत्री दोनों पर सैंकड़ों केसेज़ हैं। अगर मैं गिनाऊँ तो सालों लग जाएँ।
जंगलराज हो गया है हमारे देश में यारो! कब समझोगे तुम?
जहाँ पनाह ये कुर्सी है, अगर कुछ कर नहीं सकते तो इस्तीफ़ा दे दीजिए कुर्सी से उतर जाइए, ये आप का जनाज़ा नहीं है जो आप को चार कांधों की ज़रूरत पड़े।
ये लेखक के निजी विचार हैं केअर ऑफ़ मीडिया इस का समर्थन नहीं करता
Previous Post Next Post

POST ADS1

POST ADS 2