...और फिर पुलिस ने फर्जी पत्रकारों की एक न सुनी


अमन पठान
कानपुर। पत्रकारिता का रौब गांठने वाले फर्जी पत्रकारों की उस वक़्त टांय टांय फिस्स हो गई। जब एक पुलिस अफसर ने पत्रकारिता से सम्बंधित सवाल पूंछ लिए। 1000-500 रूपये में प्रेस कार्ड बनवाकर कुछ तथाकथित पत्रकार वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की आँखों में धूल झौंकने का काम करते हैं, लेकिन अब कानपुर में फर्जी पत्रकारों की पत्रकारिता नही चल पायेगी।
आज फूलबाग चौराहे पर टीआई दिनेश कुमार सिंह दल बल के साथ वाहन चेकिंग कर रहे थे। चेकिंग के दौरान पहले तो दो चार प्रेस लिखे वाहनों को छोड़ दिया। उसके बाद उन्हें हर तीसरे वाहन पर प्रेस लिखा नजर आया तो उन्होंने खुद को पत्रकार बताने वाले पत्रकारों से पत्रकारिता से जुड़े सवाल पूंछना प्रारम्भ कर दिए तो तथाकथित पत्रकार बगलें झांकते नजर आये।
उसके बाद जिसने भी खुद को पत्रकार बताया तो टीआई ने पत्रकारिता से जुड़े सवाल पूंछे। जिसने सही जबाव दिया। उसके वाहन को बाइज्जत छोड़ दिया गया और सवाल का जबाव न दे सके उनके वाहनों के चालान करने के साथ कड़ी चेतावनी भी दी गई। अगर उन्होंने दुबारा कहीं खुद को पत्रकार बताया तो उन्हें कठोर सजा दी जायेगी। पुलिस की इस कार्रवाई से फर्जी पत्रकारिता जगत में हड़कंप मचा हुआ है।
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